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कुंडली मिलान

वैदिक संस्कृति के 16 संस्कारों में से विवाह एक मुख्य संस्कार है। किसी भी विवाह में सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सबसे महत्वपूर्ण पक्ष दो लोगों के बीच का सम्बन्ध होता है। संबंध जितना सामंजस्य व सौहार्दपूर्ण होगा वैवाहिक जीवन उतना ही खुशहाल व सुखमय होगा। वैदिक ज्योतिष में कुंडली मिलान या मेलापक इसी बात को सुनिश्चित करने का एक प्रमुख साधन है, जो वैवाहिक संबंध के वैदिक अनुकूलता का विश्लेषण करता है। कुंडली मिलान यह सुनिश्चित करता है कि वैवाहिक जीवन सुखी, स्वस्थ और आनंदमय हो।

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कुंडली मिलान क्या है ?

कुंडली मिलान सदैव से ही वैदिक विवाह में एक मुख्य भूमिका निभाता आ रहा है, किन्तु आज के आधुनिकता के परिपेक्ष्य में इसकी उपयोगिता और महत्ता और अधिक बढ़ गयी है। कारण आधुनिकता की होड़ में जिस प्रकार का भागदौड़ का जीवन हम जी रहें हैं, इसमें हम धैर्य व सहनशीलता के गुण को खोते जा रहे हैं। जो कि वैवाहिक जीवन की सफलता का आधार है। इसलिए विवाह को सुखी व समृद्ध बनाने के लिए मेलापक द्वारा भविष्य के संभावित परिणामों के बारे में जानना आवश्यक हो जाता है। वैदिक ऋषि का कुंडली मिलान द्वारा आप यह जान सकते हैं कि संभावित जोड़े का जीवन कितना सुखी, शांतिपूर्ण और समृद्ध होगा।

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कुंडली मिलान कैसे कार्य करता है ?

कुंडली मिलान को गुण मिलान के रूप में भी जाना जाता है। किसी भी वैवाहिक संबंध के जुड़ने से पहले वर व वधु के कुंडली में अष्टकूट या आठ प्रकार के गुण का मिलान किया जाता है। ये गुण है – वर्ण, वश्य, तारा, योनि, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी । इन सब को मिलान से कुल 36 अंक बनते हैं। यदि वर-वधु दोनों की कुंडली में 36 में से 18 गुण मिलते हैं तो यह माना जाता है कि शादी सफल रहेगी। ये 18 गुण स्वास्थ, दोष, प्रवृति, मानसिक स्थिति, संतान आदि से सम्बंधित होते हैं। लेकिन इसके हर पक्ष को समझने के लिए अनुभवी ज्योतिषीय से विचार-विमर्श करना अच्छा होगा।

कुंडली मिलान के मुख्य रूप से 2 तरीके हैं :
  • नाम-आधारित कुंडली मिलान
  • जन्म तिथि-आधारित कुंडली मिलान
matching by name

नाम-आधारित कुंडली मिलान में दो व्यक्ति के बीच के सम्बन्ध की अनुकूलता को उनके नाम के आधार पर जांचा जाता है। इसे गुण मिलान भी कहा जाता है कारण इसमें वर-वधु के गुणों का मिलान नाम के आधार पर होता है। यदि वर या वधु में से किसी का भी जन्म विवरण न मालूम हो तो नाम-आधरित कुंडली मिलान का प्रयोग होता है।

matching by date of birth

जन्म तिथि-आधारित कुंडली मिलान पद्धति को जन्म पत्रिका मिलान के रूप में भी जाना जाता है। यह पद्धति सदियों पुरानी अष्टकूट पद्धति पर आधारित है जो दो व्यक्तियों के संबंध को उनके जन्म विवरण के आधार पर अनुकूलता का मूल्यांकन करता है।

कुंडली मिलान आवश्यक क्यों है ?

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अनुकूलता

कुंडली मिलान का मुख्य उद्देश्य 36 गुणों को आधार मानकर वर-वधु के संबंध की अनुकूलता के स्तर का मूल्यांकन करना है। प्रत्येक गुण जीवन के एक विशिष्ट और महत्वपूर्ण पहलू का प्रतिनिधित्व करता है और इसके आधार पर जोड़े के गुण की गणना की जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जितना अधिक गुण मिलेगा, दाम्पत्य जीवन उतना ही सुगम होगा।

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स्थिरता

जब दो लोगों का वैवाहिक सम्बन्ध जुड़ता है तो उनकी अपनी कुंडली में ग्रहों की स्थिति न केवल उनके बल्कि उनके जीवनसाथी के जीवन को भी प्रभावित करता है। कुंडली मिलान के 8 गुणों में से सातवां 'भकूट' गुण सम्बन्ध के संयुक्त प्रभाव का प्रतिनिधित्व करता है। कुंडली मिलान से हमें विवाहोपरांत जोड़े के वित्तीय स्थिरता, करियर की प्रगति, और समग्र सुख-सुविधा के महत्वपूर्ण कारकों को जानने का मौका मिलता है।

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विशेषज्ञ मार्गदर्शन

वैदिक ऋषि के प्रधान ज्योतिषी, पंडित ऋषिराज तिवारी हैं, जिन्हें वैदिक ज्योतिष और वास्तु शास्त्र जैसे क्षेत्र में 30 से अधिक वर्षों का कार्य करने का अनुभव है। पंडितजी के पास कठिन वैवाहिक समस्याओं से मुक्ति पाने और उन्हें आनंदमय वैवाहिक जीवन की ओर अग्रसर करने हेतु आवश्यक ज्योतिषीय उपाय व सहायता करने का व्यापक अनुभव है।

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दोष

वैदिक ज्योतिष के अनुसार किसी व्यक्ति के भाग्य का निर्धारण उसके जन्म के समय आकाश में स्थित ग्रहों की स्थिति से होता है। यदि जन्म पत्रिका में स्थित ग्रह सही ढंग से सम्बंधित नहीं होते हैं, तो वे दोषों का कारण बनते हैं जैसे कि सर्प दोष, मंगल दोष, शनि दोष, आदि। ये दोष विवाह के बाद समस्या उत्पन्न कर सकते हैं, जिसे कुंडली मिलान द्वारा जाना जा सकता है और उनका उपाय करने में सहायता मिल सकती है।

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वैदिक ऋषि के बारे में

वैदिक ऋषि एक एस्ट्रो-टेक कंपनी है जिसका उद्देश्य लोगों को वैदिक ज्योतिष को प्रौद्योगिकी तरीके से पेश करना है।

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